2- ग़ज़ल

2- ग़ज़लडा. अहमद अली बर्की़ आज़मी सता लेँ हमको दिलचसपी जो है उनको सताने मेँहमारा क्या वह हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने मेँलडाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजानतीजा चाहे जो कुछ हो मुक़ददर आज़माने मेँजिसे भी देखिए है गर्दिशे…

2- ग़ज़लडा. अहमद अली बर्की़ आज़मी सता लेँ हमको दिलचसपी जो है उनको सताने मेँहमारा क्या वह हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने मेँलडाएगी मेरी तदबीर अब तक़दीर से पंजानतीजा चाहे जो कुछ हो मुक़ददर आज़माने मेँजिसे भी देखिए है गर्दिशे…

1- ग़ज़लडा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी नहीँ है उसको मेरे रंजो ग़म का अंदाज़ाबिखर न जाए मेरी ज़िंदगी का शीराज़ाअमीरे शहर बनाया था जिस सितमगर कोउसी ने बंद किया मेरे घर का दरवाज़ासितम शआरी में उसका नहीँ कोई हमसरसितम शआरोँ…





जिस तरफ देखो प्रदूषण का उधर फैला है जालडा. अहमद अली बर्क़ी आज़मीवास्तव मेँ है ग्लोबल वीर्मिंग का यह कमालअहले अमरीका जिसने कर दिया जीना मुहालहै कहीँ कटरीना और रीटा कहीँ ज़ेरे सवालहै यह फितरत का इशारा हर कमाले रा…


