सुनिता विलियम

सुनिता विलियम
सुनिता विलियम के ख़लाई तजरबे का मरहलह
और फिर नासा से उसकाएक मुसलसल राबतह
असरे हाज़िर में है यह साईंस का औजे कमाल
मुददतों करते रहैंगे लोग जिसका तज़करह
कुछ भी नामुमकिन नहीं है हो अगर अज़मे सफर
दरसे इबरत है हमारे वासते यह वाक़ेयह
जिन में है ज़ौके तजससुस और असरी आगही
उनका है शामो सहर तहकी़क फितरी मशग़लह
नौ दिसमंबर को रवानह वह हुई सूऐ फ़लक
लायक़े तहसीं है यह अज़मे सफर यह हौसलह
थी फ़ज़ा में नौ महीने तक वह सरगरमे अमल
कारनामह उसका यह है आज तक बेसाबक़ह
एक ज़ररीं बाब है तारीख़ का तेईस जून
कामयाबी से हुआ तकमील जब यह मरहलह
होंगे फितरत के बहुत से राज़ हम पर मुनकशिफ
अहले दानिश जब करेंगे इसका इलमी तजज़ियह
आ गया अटलांटिस ले कर ख़लाबाजोँ को साथ
अब मिले गा उनको उनकी कामयाबी का सिलह
अहदे हाज़िर मेँ है अब साइँस बेहद सूद मंद
आइऐ मिल जुल के हम भी यह करें अब फैसलह
हम भी अपनाँऐँगे इस को अहले मग़रिब की तरह
रुक नहीँ सकता कभी तहक़ीक़ का यह सिलसिलह
अहले मशरिक़ इलमोँ दाँनिश मेँ किसी से कम नहीँ
कमयाबी से किया सुनिता ने तै यह मरहलहदर हक़ीक़त है यह बरक़ी एक मिशन तारीख़साज़
सुनिता विलियम का सफर साँइंस का है मोजज़ह
डा. अहमद अली बरक़ी आज़मी, ज़ाकिर नगर, नई दिलली- 110025

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