तूफाने नर्गिस

तूफाने नर्गिस
आज मायंमार है तूफाने नर्गिस का शिकार
है गलोबल वार्मिंग का उसपे यह भरपूर वार
कीजिए राहे अमल मिल जुल के कोई अख़तेयार
वरना आते ही रहैँगे यह हवादिस बार बार
हो गए बरबाद लाखोँ हैँ हज़ारोँ ला पता
लौटने का लोग जिनके कर रहे हैँ इंतेज़ार
जा बजा बिखरे हुए हैँ हर तरफ लाशोँ के ढेर
बच गए हैँ जो उन्हेँ है अब मदद का इंतेज़ार
है यह फिरत के तवाज़ुन के बिगडने का अमल
आ रहा है एक तूफाने हवादिस बार बार
क्यूँ बिगडता जा रह है संतुलन परा्कृति का
लोग करते ही नहीँ इस बात पर कोई विचार
क्योँ कयोटो सन्धि पर करता नहीँ कोई अमल
इन मसायल के लिए है नैए इंसाँ ज़िम्मेदार
अब भी गर सोचा न इस आग़ाज़ के अंजाम पर
आज मायंमार है कल होगा इसका हमपे वार
पहले रीटा आया,फिर कटरीना और नर्गिस ने आज
कर दिया है दामने इंसानियत को तार तार
आज है दरकार उनको बैनुलअक़वामी मदद
जो हैँ मायंमार मेँ तूफ़ाने नर्गिस के शिकार
आज हैँ हर मुल्क को दरपेश ऐसे सानहे
पहले बंगलादेश था सैलाबो तूफ़ाँ का शिकार
हर तरह का है पलूशन बाइसे सोहाने रूह
इस से बजने की करेँ तदबीर फ़ौरन अख़तेयार
वक़्त की है ज़रूरत आज ऐ अहमद अली
रखेँ फितरत के तवाज़ुन को हमेशा बरक़रार
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई देहली-110025

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